सोमवार, 19 अक्टूबर 2020

WHAT IS NARCO TEST AND WHEN THIS DO IT ( नार्को टेस्ट क्या होता है और इसे कब किया जाता है ) IN HINDI - UNIQUE HINDI POST


नार्को टेस्ट क्या होता है ( WHAT IS NARCO TEST )



नार्को टेस्ट के बारे ( ABOUT NARCO TEST ) :-


नार्को टेस्ट यह एक प्रक्रिया है जिसमे किसी व्यक्ति से सच उगलवाने के लिए उसे एक औषधिय सुई अथवा इंजेक्शन दिया जाता है जिससे वह आधा होश मे और आधा बेहोश होता है जिसके कारण वह व्यक्ति सच उगलने लगता है। सुई मे जिस औषधि का उपयोग किया जाता है उस औषधि का नाम "सोडियम पेंटोथल" है जिसके कारण वह सम्मोहित हो जाता है इस औषधि को कभी-कभी "ट्रुथ सिरम" भी कहा जाता है इसका उपयोग द्वितीय विश्व युद्ध मे बहुत होता था और यह उस समय बहुत प्रचलित भी था यदि इसे अधिक मात्रा मे दिया जाए तो यह उस अंग को सन्न भी कर सकता है और ऐसा करने के लिए कभी-कभी इसका उपयोग भी किया जाता रहा है।

नार्को टेस्ट कब किया जाता है ( WHEN NARCO TEST APPLY )


नार्को टेस्ट का उपयोग तब किया जाता जब किसी व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगे हो और वह दोषी हो लेकिन वह सच नही बताता तब नार्को टेस्ट का उपयोग किया जाता है। नार्को टेस्ट जिसका करना है उसके लिए उसकी इच्छा होनी चाहिए तब ही नार्को टेस्ट किया जाता है अथवा नार्को टेस्ट जिसपर किया जा रहा है उसकी अनुमति होनी आवश्यक है अन्यथा यदि उसकी अनुमति नही है तो कोई भी उसका नार्को टेस्ट नही कर सकता यदि किसी ने ऐसा किया तो उसपर कानूनी कारवाई की जाती है। अनुमति इसलिए ली जाती है क्योंकी सभी को बोलने का अधिकार है जो की मुलभूत अधिकारो मे से एक है और यदि नार्को टेस्ट बिना अनुमति के किया गया तो इसे मुलभूत अधिकारो का हनन कहा जाएगा जिसपर कानूनी कारवाई की जाती है।


सोमवार, 17 अगस्त 2020

शाकाहारी या मांसाहारी इनमे से क्या है मानव जाति ? ( VEGETARIAN OR NON-VEGETARIAN WHICH OF FOLLOWING IS MANKIND ? ) - UNIQUE HINDI POST


शाकाहारी या मांसाहारी इनमे से क्या है मानव जाति ? ( VEGETARIAN OR NON-VEGETARIAN WHICH OF FOLLOWING IS MANKIND ? )



मनुष्य शाकाहारी है या मांसाहारी ( IS MAN A VEGETARIAN OR A NON-VEGETARIAN )


जब भी यह प्रश्न किसी व्यक्ति को आता है तो वह बहुत सोच मे पड जाता है की मानव जाति शाकाहारी है या मांसाहारी और वह इसका उत्तर खोजने लग जाता है लेकिन जब वह इसे खोजता है इंटरनेट पर तो उसे मिश्रित लेख मिलते है जैसे की कुछ लेख मे लिखा होता है की अथवा कई लोग कहते है की मानव जाति मांसाहारी है क्योंकी उसके नुकिले दांत है और मांसाहारी प्राणियो के दांत नुकिले होते है क्योंकि उन्हे मांस को फाडकर खाना पडता है इसलिए और कही-कही आपको यह बताया जाता है की मानवो मे शाकाहार और मांसाहार करनेपर दोनो मे अंतर बताया जाता है जिसमे बताया गया होता है की शाकाहार खानेपर मानवो को बिमारिया आदि कम होती है और मांसाहारा करनेपर मानव को कई बिमारियो का खतरा बन जाता है

लेकिन हम आपको इसके बारे मे बाद मे बताएंगे की शाकाहार करनेवाले मानवो के शरीर और मांसाहार करनेवाले मे से कौन सबसे श्रेष्ठ होता है और किसका आहार करना श्रेष्ठ होता है यह बाते हम आपको अगले लेख मे बताएंगे। आज हम आपको बताएंगे की मानव शाकाहारी है या मांसाहारी तो इसे जानने का एक सर्वोत्तम उपाय शरीर की बनावट है क्योंकी शाकाहारी प्राणियो की बनावट अलग होती है और मांसाहार करनेवाले प्राणियो की बनावट अलग होती है इसके लिए हम आपको नीचे एक तालिका दे रहे है जिसमे शाकाहारी प्राणियो की बनावट और मांसाहारी प्राणियो की बनावट के बारे मे अंतर स्पष्ट किया गया है :-

शाकाहारी और मांसाहारी प्राणियो के बनावट अथवा दोनो मे अंतर स्पष्ट की गई तालिका :-



क्रमांक

शाकाहारी प्राणियो की बनावट

मांसाहारी प्राणियो की बनावट

1

आंखे लम्बी होती है, अंधेरे मे चमकती नही और अंधेरे मे देख नही सकती अथवा जन्म के साथ ही खुलती है।

आंखे गोल होती है, अंधेरे मे देख सकती है और अंधेरे मे चमकती है अथवा जन्म के 5-6 दिन बाद खुलती है।

2

सूंघने की शक्ति कम होती है मांसाहारियो के मुकाबले

सूंघने की शक्ति बहुत अधिक होती है

3

बहुत अधिक आवृत्तिवाली आवाज को नही सुन पाते है।

बहुत अधिक आवृत्तिवाली आवाज को सुन लेते है।

4

दांत और दाढ दोनो होते है, चपटे होते है अथवा एकबार गिर जाने के बाद दोबारा आते है।

दांत नुकीले होते है। सारे मुह मे दांत ही होते है अथवा एकबार ही आते है।

5

ये भोजन को पीसते है, तो इसलिए इनका जबडा ऊपर-नीचे अथवा दाए-बाए भी चलता है।

मांस को फाडकर निगलते है इसलिए इनका जबडा ऊपर-नीचे चलता है।

6

भोजन करते समय एकबार भोजन मुह मे लेने के बाद निगलने तक मुह बंद रखते है।

मांस खाते समय बार-बार मुह को खोलते एंव बंद करते है।

7

जीभ आगे से चौडाई मे कम होती है तथा गोलाईदार होती है।

जीभ आगे से चपटी व पतली होती है और आगे से चौडी होती है।

8

शाकाहारी जीवो की जीभपर टेस्ट बड्ज(Taste Buids) की संख्या अधिक होती है(20.000-30,000 की संख्या मे) मनुष्यो की जीभपर इसकी संख्या 24,000-25,000 तक होती है।

मांसाहारी जीवो की जीभपर टेस्ट बड्ज(Taste Buids) कम होते है(500-2000 की संख्या मे) इसकी सहायता से स्वाद का पहचान की जाती है।

9

मुह की लार क्षारीय(ALKALINE) होती है।

मुह की लार अम्लीय(ACIDIC) होती है।

10

पेट की बनावट बहुकक्षीय होती है। मनुष्य का पेट दो कक्षीय होता है।

पेट की बनावट एक कक्षीय होती है।

11

पाचन संस्थान(मुह से गुदा तक की) की लम्बाई अधिक होती है सामान्यत: शरीर की लम्बाई से 5-6 गुणा होती है।

मांसाहारी प्राणियो के पाचन संस्थान(मुह से गुदा तक की) की लम्बाई कम होती है सामान्यत: शरिर की लम्बाई का 2-3 गुणा होती है।

12

शाकाहारी प्राणियो के पेट के पाचक रस मांसाहारीयो के अंतर मे बहुत कम तेज होते है तथा मानवो के पेट के पाचक रसो की सांद्रता शाकाहारियोवाली होती है।

मांसाहारी प्राणियो के पेट के पाचक रस(सांद्र) बहुत तेज होते है शाकाहारियो के मुकाबले इनके पाचक रस 12-15 गुणा ज्यादा तेज होते है।

13

छोटी आंत चौडाई मे काफी कम और लम्बाई मे बडी आंत से काफी ज्यादा लम्बी होती है।

मांसाहारी प्राणियो मे छोटी आंत एंव बडी आंत की लम्बाई-चौडाई मे अधिक अंतर नही होता।

14

शाकाहारी प्राणियो मे किण्वन बैक्टीरिया(Fermentation Bacteria) होते है, जो कार्बोहाईड्रेट के पाचन मे सहायक होते है।

मांसाहारी प्राणियो मे कार्बोहाईड्रेट नही होता,इस कारण मांसाहारीयो की आंतो मे किण्वन बैक्टीरिया नही होते है।

15

आंतो मे उभार व गड्डे(Grooves) अर्थात अंदर की बनावट चूडीदार होती है।

आंते पाईपनुमा होती है अर्थात अंदर से सपाट होती है।

16

शाकाहारीयो के लीवर के पाचक रस मे वसा को पचानेवाले पाचक रस की न्युनता होती है, पित को छोडता है तथा तुलनात्मक आधार मे छोटा होता है।

इनका लीवर वसा और प्रोटीन को पचानेवाला पाचक रस अधिक छोडता है, पित को जमा करता है अथवा आकार मे बडा होता है।

17

शाकाहारी प्राणि मांसाहारीयो के मुकाबले अग्राशय अधिक मात्रा मे एंजाईम छोड्ता है।

इनका अग्राशय कम मात्रा मे इंजाईम छोडता है।

18

खून की प्रकृति क्षारीय(ALKALINE) होती है।

खुन की प्रकृति अम्लीय(ACIDIC) होती है।

19

आंतो मे उभार व गड्डे(Grooves) अर्थात अंदर की बनावट चूडीदार होती है।

आंते पाईपनुमा होती है अर्थात अंदर से सपाट होती है।

20

शाकाहारीयो मे गुर्दे(Kidney) मांसाहारीयो की तुलना मे छोटे होते है।

प्रोटिन के पाचन से काफी मात्रा मे युरिया व युरिक अम्ल बनता है जिसे रक्त से काफी मात्रा मे यूरिया आदि को हटाने के लिए बडे आकार के गुर्दे होते है।

21

शाकाहारीयो मे गुदा के ऊपर का भाग रेक्टम होता है।

इनमे रेक्टम नही होता है।

22

शाकाहारी प्राणियो की पीठ पर भार ढो सकते है।

इनकी रिढ की बनावट ऐसी होती है की पीठ पर भार नही ढो सकते।

23

शाकाहारीयो के नाखून चपटे और छोटे होते है।

इनके नाखून आगे से नुकिले गोल और लम्बे होते है।

24

शाकाहारी प्राणि तरल पदार्थ को घुंट-घुंट कर पीते है।

ये तरल पदार्थ को चाटकर पीते है।

25

शाकाहारीयो को पसीना आता है।

इन्हे कोई पसीना नही आता है।

26

शाकाहारी प्राणियो की बच्चे को जन्म देने का समय 6-18 महिने तक का होता है।

मांसाहारी प्राणि 3-6 महिने मे बच्चे को जन्म दे देते है।

27

ये पानी अपेक्षाकृत ज्यादा पीते है।

ये पानी कम पीते है।

28

शाकाहारीयो श्वास लेने की प्रक्रिया धीमी होती है तथा आयु अधिक होती है।

इनमे श्वास लेने प्रक्रिया तेज होती है।

29

यह जीव थकनेपर मुह खोलकर नही हाँफते और गर्मी मे जीभ बाहर नही निकालते।

यह थकने पर व गर्मी मे मुह खोलकर जीभ निकालकर हाँफते है।

30

शाकाहारी रात को सोते है, दिन मे सक्रिय होते है।

प्राय: दिन मे सोते है, रात को जागते व घुमते-फिरते है।

31

यह अपने बच्चे को नही मारते और बच्चे के प्रति हिंसक नही होते है।

यह क्रूर होते है,आवश्यक्ता पडने पर अपने बच्चे को भी मारकर खा सकते है।

32

यह प्राणि दुसरे जानवरो को डराने के लिए गुर्राते नही है।

यह प्राणि दुसरे जानवरो को डराने के लिए गुर्राते है।

33

शाकाहारीयो मे रिस्पटरो की संख्या कम होती है।

इनमे रिस्पटरो की संख्या अधिक होती है, जो ब्लड मे कोलेस्ट्रोल को नियंत्रित करते है।

34

शाकाहारी कच्चा मांस नही खाते अथवा नही खा सकते।

यह किसी भी जानवर को मारकर उसका मांस कच्चा ही खाते है।

35

शाकाहारीयो के मल-मुत्र मे दुर्गंध नही होती है अथवा बहुत कम दुर्गंध होती है।

इन प्राणियो के मल-मुत्र मे दुर्गध होती ही है।

36

शाकाहारीयो के उर्जा प्राप्ति के लिए भिन्न प्रोटीन प्रयोग मे लाए जाते है।

इनके पाचन संस्थान मे पाचन के समय उर्जा प्राप्त करने के लिए अलग प्रकार के प्रोटीन उपयोग मे लाये जाते है जो शाकाहारीयो से भिन्न होते है।

37

शाकाहारीयो के पाचन संस्थान मे जो इंजाईम बनते है वह वनस्पतिजन्य पदार्थो को पचाते है।

इनके पाचन संस्थान मे जो इंजाईम बनते है वह वह मांस का ही पाचन करते है।

38

शाकाहारीयो के शरीर का तापमान मनुष्य के तापमान के आस-पास होता है।

इनका तापमान शाकाहारीयो से कम होता है क्योंकी मांसाहारीयो का बेसिक मेटॉबोलिक रेट(Basic Metabolic Rate,BMR) कम होता है।




कुछ अधिक जानकारी(SOME MORE INFORMATION) :- तालिका मे दी गई जानकारी के अनुसार मानव जाति शाकाहारी है इसके अलावा आप एक और प्रयोग कर सकते है जिसमे आप 1 महिने तक एक जगह शाकाहर रखे और दुसरी ओर मांसाहार और आप कोई भी शाकाहारी या मांसाहारी प्राणि को इसके सामने लाईये अगर प्राणि मांसाहारी है तो वह सिर्फ मांसाहार की खाएगा और यदि शाकाहारी है तो वह शाकाहार ही खाएगा और यदि आपको लगता है की आप एक मांसाहारी प्राणि है तो आप कुछ दिनो/महीने तक आप सिर्फ और सिर्फ मांस ही खाके देखे आपके शरीर पर उसका क्या दुष्प्रभाव पडेगा आप उसे देखकर समझ जाएंगे। यह जानकारी डॉ भूपसिह जो की भौतिक विज्ञान के एक रिटायर्ड एसोशिएट प्रोफेसर है भिवानी,हरियाणा से उन्होने यह जानकारी हाल ही मे प्रस्तुत की थी।

गुरुवार, 6 अगस्त 2020

टाइम कैप्सुल अथवा कालपात्र क्या होता है और इसका उपयोग किसलिए किया जाता है ( WHAT IS TIME CAPSULE AND WHAT IS IT USED FOR ? ) - UNIQUE HINDI POST


टाइम कैप्सुल अथवा कालपात्र क्या होता है और इसका उपयोग किसलिए किया जाता है ( WHAT IS TIME CAPSULE AND WHAT IS IT USED FOR ? )



टाइम कैप्सुल/कालपात्र के बारे (ABOUT TIME CAPSUL/KAALPAATRA) :-


टाइम कैप्सुल एक प्रकार की वस्तु होती है जो किसी ऐतिहासिक स्थान या महल अथवा मंदिर आदि मे डाला जाता है और इसे इतना मजबूत बनाया जाता है ताकी यह किसी भी परिस्थिति मे टिका रहे इसे धरती के नीचे दबाया जाता है और इसे सैकडो सालो के लिए धरती मे दबा दिया जाता है ताकी इसे भविष्य मे निकाला जा सके। अब आपके मन मे यह प्रश्न आ रहा होगा की इसे क्यू धरती मे दबाया जाता है वो भी सैकडो सालो के लिए और इसे ऐतिहासिक स्थान पर ही क्यू डाला जाता है यह इसलिए किया जाता है ताकी वर्तमान की बाते हमारे आनेवाली पीढियो को बताया जा सके और उन्हे अपने इतिहास के बारे मे बतया जा सके की इतिहास मे उनके यहाँ की राजनीती,अर्थव्यवस्था,उस समय क्या-क्या घटनाए हुई थी आदि की जानकारी उन्हे प्राप्त हो सके।

उदाहरण के लिए जैसे वर्तमान मे आप जी रहे हो और आपने आनेवाली पीढियो को कुछ बताना चाहते हो या उन्हे जानकारीया देना चाहते हो तो आप कैसे देंगे इसके लिए आपको उतना जीना होगा और आपकी आयु भी सीमीत है आपकी मृत्यु तय है और एक सामान्य मानव लगभग 90-100 वर्ष की आयु अधिकतर जीवित होता है तो इसके बाद आप आनेवाली पीढियो को कैसे बताओगे तो इसके आप कालपात्र अथवा टाइम कॅप्सुल का उपयोग कर सकते हो जिसमे आप वर्तमान अथवा इस समय की सारी जानकारिया,अपने बारे मे,अपने देश या वर्तमान स्थिति मे पृथ्वी पर हो रही घटनाओ,इतिहास की जानकारिया आदि बहुत से दस्तावेज या कोई वस्तु को आप इसमे डालकर इसे धरती के नीचे दवा सकते है जिसे आनेवाले 200-300 वर्षो या उससे भी अधिक वर्षो बाद जब खुदाई की जाए तो आपके इस वर्तमान समय के बारे मे भविष्य की पीढियो को पता चले और इसे अधिकतर ऐतिहासिक स्थानपर ही दबाया जाता है लगभग 200 से 300 फिट नीचे ऐसा इसलिए किया जाता है की क्योंकी ऐतिहासिक स्थानो को तोडा या उसे निष्क्रिय नही किया जाता और यदि आप इसे आजकल के किसी इमारत के नीचे दबाएंगे तो इमारत को 90-120 वर्षो मे तोडा जाता है जिसके कारण आपका कालपात्र समय से बहुत जल्द ही लोगो को मिल जाएगा और उस समय हो सकता है की लोग इसके अंदर स्थित वस्तुओ का मोल ना समझे और इसे सामान्य घटना बताए या कह दे तथा इसे फेंक दे लेकिन ऐतिहासिक स्थानो पर ऐसा नही होता है उसे एक धरोहर के रुप मे रखा जाता है और यदि कोई चाहता है की दबाया गया कालपात्र एक निश्चित समय पर निकाला जाए तो ऐसा भी हो सकता है। कालपात्र को इस प्रकार बनाया जाता है कि उसमे सडन-गलन और वर्षो-वर्षो तक कोई क्षति ना हो।

भारत मे कब-कब टाइम कॅप्सुल/कालपात्र का उपयोग किया गया है ?( HOW OFTEN IS THE TIME CAPSULE/KAALPAATRA USED IN INDIA )





कालपात्र का उपयोग पुरा विश्व करता है और खासकर इसका उपयोग देश की सरकार करती है ताकी इतिहास की सही-सही जानकारी स्थित रहे और भारत मे भी इसका उपयोग होता है। सन 15 अगस्त,1973 मे इंदिरा गांधी जी ने एक टाइम कॅप्सुल को लाल किले के नीचे दबवाया था और उन्होने इसे कालपात्र का नाम दिया था लेकिन बाद मे इसपर विवाद होने से इसे बाद मे निकाल लिया गया था जिसमे भारत की आजादी के बाद के 25 वर्षो की जानकारी रखी गई थी लेकिन इसे समय से पहले अथवा 6-8 वर्षो के अंदर ही निकाल लिया गया था और अब वर्तमान समय मे भारत मे स्थित राममंदिर के पुन:निर्माण मे जब इसका कार्य आरम्भ होगा तब इसमे 200 फिट नीचे एक कालपात्र डाला जाएगा ऐसा भारत की सरकार ने निश्चय किया है।


शुक्रवार, 31 जुलाई 2020

भारत का सबसे बडा परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र कौन-सा है और कहाँ पर स्थित है ? (WHAT IS INDIA'S LARGEST NUCLEAR POWER PLANT AND WHERE IS IT LOCATED ?) - UNIQUE HINDI POST


भारत का सबसे बडा परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र कौन-सा है और कहाँ पर स्थित है ? (WHAT IS INDIA'S LARGEST NUCLEAR POWER PLANT AND WHERE IS IT LOCATED ?)



भारत के सबसे बडे परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र के बारे मे (INDIA'S BIGGEST NUCLEAR POWER PLANT) :-


भारत का सबसे बडा परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र तमिलनाडु के जिले तिरुनेलवेली के कुडनकुलम मे स्थित है जिसका नाम कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र(KUDANKULAM NUCLEAR POWER PLANT) है। कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र मे 2 ईकाईया अथवा युनिट है जिसमे कुल मिलाकर 2000 मेगावाट(MW) की बिजली निर्माण करता है। दोनो ईकाईयो/युनिट की लागत कुल मिलाकर 13,171 करोड थी लेकिन बाद मे इसे संशोधित कर 17,270 करोड कर दिया गया अथवा इसमे दो और ईकाई/युनिट(UNIT) निर्माण करने का निश्चय किया गया जिसके बाद फरवरी,2016 मे इसमे ईकाई/युनिट 3 और 4 की जमीन तोड समारोह का आरम्भ किया गया जिसकी लागत कुल मिलाकर 40,000 करोड तक है। इसका निर्माण कार्य 31 मार्च,2002 मे न्युक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड(NUCLEAR POWER CORPORATION OF INDIA) द्वारा किया गया और उन्होने इसे दिसंबर 2007 तक इसका निर्माण कार्य पुरा करने की अवधि दी और बाद मे उन्होने भविष्यवाणी की कि इसका निर्माण कार्य इससे भी जल्दी होगा जो की मार्च,2007 तक दि गई अथवा यह भी बताया की इसकी पहली ईकाई इस अवधी मे आरम्भ होगी और इस समय इस परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र मे छह रिएक्टर है। 14 जनवरी,2004 मे कुडनकुलम मे एक छोटा बंदरगाह का निर्माण कराया गया जिसकी स्थापना पानी के रिएक्टर उपकरण ले जानेवाले बजरो को प्राप्त करने के लिए की गई थी अथवा इसमे और ईकाई बढाने का निश्चय हो रहा है इस वर्ष 2020 मे 5 और 6 के निर्माण की उम्मीद थी लेकिन अभी तक इसपर कोई टिप्प्णी नही दी गई है।

2019 मे कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र मे एक साइबर अटैक(CYBER ATTACK) किया गया जिसे लजारस ग्रुप द्वारा किया गया था जिसके बाद यह पुख्ता किया गया की और बताया गया की यह साइबर अटैक प्रुफ है।

इस सन्यंत्र को बनाना बहुत बडा विवाद था क्योंकी इसे लेकर स्थानीय मछुआरे आदोलन(PROTEST) कर रहे थे और वह इसके विरोध मे भी थे जिसके कारण इसका निर्माण कार्य तय समय पर पुरा नही हुआ।( हम यहाँ निर्माण कार्य का उल्लेख कर रहे है ईकाई/युनिट आरम्भ करने का नही)






रविवार, 26 जुलाई 2020

विश्व का सबसे बडा परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र कहा है ?(WHERE IS WORLD'S BIGGEST NUCLEAR POWER PLANT) - UNIQUE HINDI POST


विश्व का सबसे बडा परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र कहा है ?(WORLD'S BIGGEST NUCLEAR POWER PLANT)



विश्व के सबसे बडे परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र के बारे मे


सबसे बडे परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र का नाम (NAME OF NUCLEAR POWER PLANT) :-

काशिवाजाकी-करिवा न्युक्लेअर पावर प्लांट (KASHIWAZAKI-KARIWA NUCLEAR POWER PLANT)

यह कहाँ पर स्थित है (ADDRESS OF POWER PLANT) :-

नीगाटा प्रेफेक्चर(प्रांत),जापान (NIIGATA PREFECTURE,JAPAN)

यह किसके स्वामित्व मे है (OWNER) :-

टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कम्पनी (TOKYO ELECTRIC POWER COMPANY)

इस परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र की कुल क्षमता (TOTAL CAPACITY) :-

7965 मेगावाट (Megawatt)

इसका आरम्भ कब किया गया (OPENING DATE) :-

18 सप्टेम्बर,1985(18 SEPTEMBER,1985)

इसका कुल क्षेत्रफल (SITE) :-

1000 एकड/4.2 घनकिलोमीटर (1000 ACRE/4.2 SQUARE KILOMETRE)



विश्व का सबसे बडा परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र जापान के नीगाटा प्रेफेक्चर(प्रांत) मे स्थित है और इसका नाम काशिवाजाकी-करिवा न्युक्लेअर पावर प्लांट (KASHIWAZAKI-KARIWA NUCLEAR POWER PLANT) है। इस परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र की कुल क्षमता 7965 मेगावाट है और इस परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र की 7 ईकाई/युनिट है जिसमे पांच 1100 मेगावाट और दो 1356 मेगावाट की क्षमतावाले ईकाई/युनिट लगे हुए है। इस परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र(NUCLEAR POWER PLANT) का निर्माण कार्य सन 1980 मे आरम्भ हुआ और इसके पहले युनिट को सप्टेंबर,1985 से व्यवसायिक संचालन आरम्भ किया गया और इसके अंतिम युनिट को सन 1997 को जुलाई से व्यवसायिक रुप से संचालित किया गया। इस परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र पर टोक्यो इलेक्ट्रिक पावर कम्पनी (TOKYO ELECTRIC POWER COMPANY) का स्वामित्व है अथवा यह इसके मालिक है। जुलाई,2007 मे आए भूकंप के केंद्र से यह परमाणु ऊर्जा सन्यंत्र सिर्फ 19 किलोमीटर दुर था और इस भुकंप ने इसकी आधार और संरचना को हिला दिया था और जब भुकंप के बाद इसका निरिक्षण किया गया था तब यह पता चला की इसे आरम्भ करने के लिए इसका अधिक से अधिक भुकंप-रोधी बनाना होगा जिसके बाद यह 21 महिनो तक बंद रहा और उसके बाद मई,2009 को इसकी युनिट संख्या 7,1,5 और 6 फिर शुर किया और बचे हुए शेष 2,3,4 को शुरु नही किया गया और इसके बाद मार्च,2011 को एक और भुकंप आने के कारण इसे पुरी तरह बंद कर दिया गया और यह वर्तमान समय मे भी बंद है और इसे 2021 तक आरम्भ करने की आशंका है।





इस लेख मे ली गई सभी जानकारी का स्त्रोत WWW.TEMPO.CO.JP इस वेबसाइट से ली गई है यदि आपको इसके बारे मे और अधिक जानकारी चाहिए तो आप नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके सीधे इनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर पहुंच जाएंगे।



शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

विश्व के सबसे पहले विडियो गेम को किस व्यक्ति ने बनाया था और कब ( WHO IS THE INVENTOR OF FIRST VIDEO GAME AND WHERE )(William Higinbotham) - UHP


विश्व का सबसे पहला विडियो गेम किसने बनाया और वह कैसा दिखाई देता था ? (WHO MADE THE WORLD'S FIRST VIDEO GAME AND WHAT DID IT LOOK LIKE ?)



विश्व के पहले विडियो गेम(VIDEO GAME) और इसे बनानेवाले के बारे मे


पहला विडियो गेम बनानेवाले का नाम(GAME-MAKER'S NAME) :-

विलियम हिंगिंबोथम (WILLIAM HINGINBOTHAM)

पहले विडियो गेम का नाम (WORLD'S FIRST GAME NAME) :-

टेनिस फॉर टु (TENNIS FOR TWO)

कब बनाया और कहाँ (WHEN MADE & WHERE) :-

अक्टुबर,1958 को ब्रूकहवेन नेशनल लॅबोरटॉरी ओपन हाऊस (BROOKHAVEN NATIONAL LABORATORY OPEN HOUSE)

बनानेवाले की जन्मतिथि और स्थान (MAKER'S BIRTHDATE AND PLACE) :-

25 अक्टुबर,1910 मे ब्रिड्जपोर्ट,कनेक्टीकट [BRIDGEPORT,CONNECTICUT(CT) ]



विलियम हिंगिंबोथम ने पहला विडियो गेम बनाया था जो की 1970 के गेम पोंग(PONG) से बहुत मेल खाता था और यह काफी प्रसिद्ध था ब्रूकहवेन नेशनल लॅबोरटॉरी ओपन हाऊस मे। विलियम हिंगिंबोथम विलियम्स कॉलेज(William's Collage) से ग्रेजुएट हुए थे सन 1932 मे और इसके बाद कॉरनेल युनिवर्सिटी मे उन्होने भौतिकीशास्त्र(Physics) की पढाई की। कॉरनेल युनिवर्सिटी(Cornell University) मे उन्होने ग्रेजुएट विद्यार्थी होकर इलेक्ट्रोनिक्स टेकनीशियन के रुप मे कार्य किया। 1941 मे वह एमआईटी(MIT) रेडिएशन लैब मे सम्मिलित हुए उन्होने वहाँ रडार सिस्टम के लिए कैथोड रे ट्यूब डिस्प्ले पर काम किया इसके बाद उन्होने 1943 मे परमाणु बम के लिए एक समय प्रणाली के इलेक्ट्रानिक्स पर काम करने लॉस अलमोस(Los Almos) चले गए। 1948 मे उन्होने ब्रुकहवेन नेशनल लॅबोरॅटरीज इंस्ट्रुमेंटेशन ग्रुप से जुड गए और वह इस ग्रुप मे अध्यक्ष(HEAD) रहे और उनका कार्यकाल 1948 से 1968 तक चला और इन्ही वर्षो मे उन्होने विडियो गेम का आविष्कार किया अथवा उसे बनाया।

विश्व के सबसे पहले गेम के पीछे का इतिहास






उस समय ब्रुकहवेन ने वार्षिक आयोजन किया था जहाँ हजारो लोग आनेवाले थे जहाँ हिंगिंबोथम की जिम्मेदारी थी की वह इंस्ट्रुमेंटेशन डिवीजन के काम को लोगो के सामने प्रदर्शित करे लेकिन मौजुदा समयतक आयोजन बहुत सुस्त हो रहे थे जब उन्होने सोचा की वह एक इंटरएक्टिव प्रदर्शन करेंगे जिसके बारे मे उन्होने ने एक मॅगजीन मे भी बताया था। इसके बाद उहोने इंस्ट्रुमेंटेशन समुह से एक एनालॉग कम्प्युटर का भी उपयोग किया उन्हे इस गेम के बारे मे सोचने के लिए और इसपर कार्य आरम्भ करने के लिए अधिक समय नही लगा और यही से "टेनिस फोर टु" गेम को बनाने की प्रक्रिया को आरम्भ किया। हिंगिबोथम ने चार कम्प्युटरस ऑपरेशनल एम्पलीफायर(Computer Operational Amplifiers) का उपयोग गेंद की गति को उत्पन्न करने के लिए उपयोग किया और बाकी छ्ह एम्पलीफायर का उपयोग उन्होने तब प्रतिक्रिया करने के लिए बनाया जब गेंद जमीन या नेट पर टकराए और तभी वह व्यक्ति या खिलाडी के रिमोट को एक्टिव करके उस खिलाडी की आज्ञा को स्वीकार करे। आरम्भ मे इस गेम को 5 इंच की स्क्रिन पर दिखाया जाता था लेकिन बाद मे इसे 10 अथवा 17 इंच के गोल स्क्रीनपर सेट कर दिया गया।








कुछ अधिक जानकारी :- पोस्ट मे दिखाए गए सभी चित्र और फोटो WWW.BNL.GOV इस वेबसाइट से लिए गए है और जानकारीया भी इसी वेबसाइट से ली गई है अगर आपको इनके बारे मे और अधिक जानकारी चाहिए तो आप इनकी वेबसाइट को देखे। आप नीचे दिए गए बटन पर क्लिक करके आप इस वेबसाइट पर तुरंत जा सकते है।



बुधवार, 22 जुलाई 2020

विश्व का सबसे बडा मंदिर भारत मे नही इस देश मे है जानिए इस मंदिर के बारे मे ( BIGGEST TEMPLE IN THE WORLD NOT IN INDIA/BHARAT ) - UHP


विश्व का सबसे बडा मंदिर कौन-सा है और कहाँ है ?





विश्व का सबसे बडा मंदिर कहाँ है ? (Where is World's Largest Temple)


विश्व का सबसे बडा मंदिर भारत मे नही है यह मंदिर भारत के बाहर है और इस मंदिर को 12वी शताब्दी मे निर्माण कराया गया था और यह मंदिर कम्बोडीया मे स्थित है और यह बडा होने के साथ-साथ सुंदर भी है अथवा इसके साथ-साथ यह एक विश्व धरोहर भी है। मंदिर का नाम "अंग्कोर वट(ANGKOR WAT)" है और कम्बोडिया(COMBODIA) देश के ध्वज के मध्य मे इस मंदिर को दर्शाया गया है अथवा इस मंदिर का चित्र ध्वज पर दर्शाया गया है। अंग्कोर वट मंदिर लगभग 402 ऐकड मे फैला हुआ है और इसके परिसर मे लगभग 1 हजार मंदिर है,अंग्कोर वट मंदिर वर्तमान समय मे बौद्ध धर्म को समर्पित है यह पहले एक हिंदु मंदिर था हम आपको इसके बारे मे आगे-आगे बताएंगे |




अंग्कोर वट मंदिर का प्राचीन इतिहास ( Ancient History Of ANGKOR WAT Temple


अंग्कोर वट मंदिर कम्बोडिया के सियाम्रेब के पास अंग्कोर मे स्थित है। अंग्कोर वट मंदिर को 12वी शताब्दी मे राजा सुर्यवर्मन द्वितीय द्वारा बनाया गया था उनका शासनकाल सन 1113-1150 तक था। अंग्कोर नगर यह शाही लोगो का केंद्र था जिसपर खमेर के राजाओ के एक राजवंश ने राज्य किया जो की इतिहास मे सबसे समृद्ध,परिष्कृत और सबसे बडे राज्यो मे से एक था। 9वी शताब्दी के अंत और 13वी शताब्दी के आरम्भ मे कई निर्माणकार्य और परियोजनाए की गई थी जिनमे से एक का उल्लेख अंग्कोर वट का किया गया था राजा सुर्यवर्मन द्वितीय ने इस विशाल मंदिर का निर्माण कराया तथा इसमे उनके अवशेषो को भी जमा किया जाना था इस मंदिर का निर्माणकार्य तीन दशक तक चला था। इसके बाद सन 1177 मे चाम लोगो द्वारा जो की आधे भारतीय और आधे चीनी थे उन्होने इस मंदिर को बर्खास्त कर दिया जिसके बाद राजा जयवर्मन ने यह निश्चय कर लिया की हिंदु देवी-देवीताओ द्वारा उन्हे विफल कर दिया गया है और जब उन्होने नई राजधानी अंग्कोर थोम बनाई तब उन्होने अंग्कोर वट मंदिर को बौद्ध धर्म को समर्पित कर दिया जिसके बाद यह एक बौद्ध तीर्थस्थल बन गया और मंदिर मे बनाई गई आकृतियो और नक्काशियो को बौद्ध कला से बदल दिया गया बौद्ध धर्म के पहले मंदिर मे हिंदु धर्म के भगवान शिव,ब्रह्मा और विष्णु की पुजा की जाती थी और मुख्य रुप से उन्हे ही समर्पित था। अंग्कोर वट मंदिर मे पांच स्तंभ थे जो मेरु पर्वत को दर्शाते है जो हिंदु मान्यताओ के अनुसार देवी-देवताओ का निवास है। मंदिर की दिवारे उच्चगुणवत्ता की आधाररहित मुर्तियो/स्तंभ से ढक हुइी है जिसमे हिंदु देवताओ और प्राचीन खमेर दृश्यो की आकृति के साथ-साथ महाभारत और रामायण के दृश्य दर्शाए गए है।

देवताओ की आकृति

भगवान विष्णु के कथा का एक दृश्य की नक्काशी

राजा सुर्यवर्मन द्वितीय की आकृति

कुछ अधिक जानकारी(SOME MORE INFORMATION) :- 15वी शताब्दी मे अंग्कोर को अपने हालपर छोड दिया गया था जहाँ थेरवाड के बौद्ध भिक्षुओ ने अंग्कोर वट मंदिर की देखभाल करने का प्रयास किया लेकिन जल रिसाव और जल जमाव ने परिसर ने इसपर प्रभाव डाला जिसे बाद मे सरकार द्वारा वर्ष 1980 मे इसकी मरम्मत का कार्य आरम्भ किया गया और कुछ वस्तुओ को वापस बनाया गया और वर्ष 2004 मे यह खतरे के संकेत से बाहर माना गया और आज यह एक बहुत ही प्रसिद्ध पर्यटन स्थल और उनेस्को द्वारा इसे विश्व धरोहर मे सम्मिलित किया गया।

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